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प्यार से........

रावेंद्रकुमार रवि अंकल ने मेरे लिये एक गीत लिखा.. कुछ दिन पहने ये उनके ब्लोग पर छपा था.. "आदित्य रंजन के लिए रावेंद्रकुमार रवि का एक गीत"   वो ही गीत आज फिर से प्रस्तुत है
प्यार से ... ... .
मम्मी की गोदी में चढ़कर,
जब उनकी आँखों में देखा,
आँखों में था सपना!
सपने में देखा, तो देखा --
दौड़-दौड़कर, कूद-कूदकर,
खेल रहा हूँ मैं,
प्यार से
खेल रहा हूँ मैं!



मम्मी की गोदी में चढ़कर,
जब उनकी नथनी में देखा,
नथनी में था अपना!
अपने को देखा, तो देखा --
उसमें बैठा बहुत शान से,
झूल रहा हूँ मैं,
शान से
झूल रहा हूँ मैं!

13 comments:

Comments

बहुत सुंदर कविता. आभार रवि जी का पल्टू के लिये इतनी सुंदर कविता लिखने के लिये.

रामराम.


वाह छोटू.. बसंत बारिश और चाँद घटाओ पे तो होती ही थी.. अब तो छोटू पर भी कविताए लिखी जा रही है.. रवि जी का आभार अपने छुटकु के लिए इतनी प्यारी कविता लिखने के लिए..


अरे वाह!! रवि अंकल ने तो आपके लिए बहुत सुन्दर कविता लिखी है. एक ठो हमारे लिए भी लिखवा दो न अपने अंकल से. :)


मम्मी की गोदी को पाकर,
कितना खुश हो जाता हूँ।

कभी मचलता, और फिसलता,
कभी शान्त सो जाता हूँ ।।


नन्हे मुन्ने राही के लिए नन्ही सी प्यारी सी कविता......बहुत सुंदर
Love ya...


कवि भी हो गये आदित्य रंजन "पल्टू"!


अरे पलटू तु मे रावेंद्रकुमार रवि जी का धन्यवाद किया की नही, अले इतनी सुंदर कविता लिखी आप के लिये, चलिये हम ध्न्यवाद कर देते है तुम्हारी ओर से , ओर तुम्हे भी प्यार


पल्टू राम , ये गीत हमने रविन्द्र कुमार जी के ब्लॉग पर पढ़ लिया था और उसी समय उनके ब्लॉग पर टिप्पणी में इस गीत के लिए आभार भी व्यक्त कर दिया था |


मम्मी और बालक एक दूसरे को पाकर
बहुत खुश हैं।

ममता का यही वास्तविक स्वरूप है।


माता की ममता से बढ़ कर दूसरा सुख कहीं नही है। रावेन्द्र जी की कविता और लेखनी सशक्त है।


बेहतरीन बाल गीत और बेहतरीन चित्र।

भाई रावेंद्र कुमार रवि को मेरी शुभकामनाएँ
प्रेषित करने का कष्ट स्वीकार करें।


उड़न-तश्तरी आई, लाई -
यहाँ नया उजियारा!

उजियारे में चमक रहा है -
सबका "आदि" दुलारा!


आदि की मोहक अदा
और
आप सबके प्रेरक संदेशों से
मुदित होकर
मन-मयूर
नृत्य कर उठा।


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