प्यार से ... ... .
मम्मी की गोदी में चढ़कर,
जब उनकी आँखों में देखा,
आँखों में था सपना!
सपने में देखा, तो देखा --
दौड़-दौड़कर, कूद-कूदकर,
खेल रहा हूँ मैं,
प्यार से
खेल रहा हूँ मैं!
मम्मी की गोदी में चढ़कर,
जब उनकी नथनी में देखा,
नथनी में था अपना!
अपने को देखा, तो देखा --
उसमें बैठा बहुत शान से,
झूल रहा हूँ मैं,
शान से
झूल रहा हूँ मैं!


February 20, 2009 at 10:04 PM
बहुत सुंदर कविता. आभार रवि जी का पल्टू के लिये इतनी सुंदर कविता लिखने के लिये.
रामराम.
February 20, 2009 at 10:13 PM
वाह छोटू.. बसंत बारिश और चाँद घटाओ पे तो होती ही थी.. अब तो छोटू पर भी कविताए लिखी जा रही है.. रवि जी का आभार अपने छुटकु के लिए इतनी प्यारी कविता लिखने के लिए..
February 20, 2009 at 10:17 PM
अरे वाह!! रवि अंकल ने तो आपके लिए बहुत सुन्दर कविता लिखी है. एक ठो हमारे लिए भी लिखवा दो न अपने अंकल से. :)
February 20, 2009 at 10:54 PM
मम्मी की गोदी को पाकर,
कितना खुश हो जाता हूँ।
कभी मचलता, और फिसलता,
कभी शान्त सो जाता हूँ ।।
February 20, 2009 at 10:57 PM
नन्हे मुन्ने राही के लिए नन्ही सी प्यारी सी कविता......बहुत सुंदर
Love ya...
February 20, 2009 at 11:00 PM
कवि भी हो गये आदित्य रंजन "पल्टू"!
February 21, 2009 at 6:26 AM
अरे पलटू तु मे रावेंद्रकुमार रवि जी का धन्यवाद किया की नही, अले इतनी सुंदर कविता लिखी आप के लिये, चलिये हम ध्न्यवाद कर देते है तुम्हारी ओर से , ओर तुम्हे भी प्यार
February 21, 2009 at 7:49 AM
पल्टू राम , ये गीत हमने रविन्द्र कुमार जी के ब्लॉग पर पढ़ लिया था और उसी समय उनके ब्लॉग पर टिप्पणी में इस गीत के लिए आभार भी व्यक्त कर दिया था |
February 21, 2009 at 8:45 AM
मम्मी और बालक एक दूसरे को पाकर
बहुत खुश हैं।
ममता का यही वास्तविक स्वरूप है।
February 21, 2009 at 8:49 AM
माता की ममता से बढ़ कर दूसरा सुख कहीं नही है। रावेन्द्र जी की कविता और लेखनी सशक्त है।
February 21, 2009 at 8:54 AM
बेहतरीन बाल गीत और बेहतरीन चित्र।
भाई रावेंद्र कुमार रवि को मेरी शुभकामनाएँ
प्रेषित करने का कष्ट स्वीकार करें।
February 21, 2009 at 9:30 AM
उड़न-तश्तरी आई, लाई -
यहाँ नया उजियारा!
उजियारे में चमक रहा है -
सबका "आदि" दुलारा!
February 22, 2009 at 5:21 AM
आदि की मोहक अदा
और
आप सबके प्रेरक संदेशों से
मुदित होकर
मन-मयूर
नृत्य कर उठा।
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