दो तो दिसंबर में ही आ गये थे.. बाकि का इंतजार तब से था..अब आयेंगे, अब आयेंगे.. अरे भाई, आखिर कब आयेंगे ये... कोई कितना इंतजार करे... एक तो कब से झांक रहा था.. पर आ नहीं रहा था.. अरे आप आओ तो कुछ और काम करें.. आपको पता नहीं मुझे आपकी कमी कितनी खलती है... आपको कितना मिस करता हूँ.. और आपके इंतजार में क्या-क्या कर रहा हुँ मैं.. अरे अब तो बहुत सुरसरी मच रही है.. आओ न, आ जाओ न.. कोई समय तो दिया नहीं... अरे आपके न होने से कितने काम रुक रहे है पता है आपको?
आया समझ, किसका इंतजार था मुझे? अरे मुझे इंतजार है अपने दांतो का और कल मेरे श्रीमुख में तीसरे महानुभव तशरिफ लाये... इस बार ऊपर वाला दाँत.. अरे ऐसे समझाना मुश्किल होगा आप तो ये 'dental map' देख लो...
इतने दिनों से बेचारे निचले वाले दांत अकेले थे, अब उनका एक साथी और आ गया....इससे मेरी पकड़ और भी मजबुत होगी न? ;-)).
February 12, 2009 at 7:06 PM
" तो नया दाँत.. आने की खुशी मनाई जा रही है.....एक फायदा तो होगा बेटा की काटने में आसानी होगी है न हा हा हा हा हा "
love ya
February 12, 2009 at 8:18 PM
अब तो और मजा आयेगा कान काटने में.. :)
February 12, 2009 at 8:57 PM
बधाई हो बेटे!!!!
February 13, 2009 at 12:08 AM
स्वागत. मुखारविंद में कुछ इंतज़ार करवा के आया नया मेहमान. कोई तकलीफ तो नही दे रहा है?
February 13, 2009 at 2:17 AM
फ़िर अब तो काटना दुगुना हो जाएगा !
February 13, 2009 at 2:44 AM
बेटा पल्टू अब आयेगा मजा पापाजी के कान को.
आखिर अब तक एकेला दांत क्या करता? अब जरा धर के दबाना. :)
रामराम.
February 13, 2009 at 8:55 AM
दांत और कान काटने को क्यों जोड़ा जा रहा है। दांत देखने में कितने सुन्दर लगते हैं।
February 13, 2009 at 10:11 AM
बच्चू अब तो तेरे से बचना होगा, जिसे एक बार पकड लिया, बिना काटे मत छॊडियो, उसे भी तो नानी याद आ जायेगी...
प्यार ओर प्यार
February 14, 2009 at 9:29 AM
बहुत खूबसूरत
Post a Comment