गाजर तो अक्सर खाने को मिलती है.. मम्मी गाजर को छील और धो कर दे देती है.. और मैं उससे अपने दांतो की खुजली मिटाता रहता हूँ.. गाजर से खेलने को खूब मिलता है, पर जीभ और पेट के लिये कुछ खास नहीं..
कल अपने पैराम्बुलेटर* में लेटा था, गाजर के मजे ले रहा था.. कि मम्मी ने एक टमाटर का टुकड़ा भी पकड़ा दिया.. टमाटर का टुकडा मेरे लिये अपेक्षाकृत नया अनुभव था.. टमाटर पर पकड़ भी अच्छी बन रही थी और खा भी पा रहा था.. टमाटर के स्वादानुसार (खट्टे) मेरे चहरे के भाव भी बदल रहे थे..
काफी देर टमाटर ने साथ दिया लेकिन आखिर में फिसल कर गिर गया.. पर चिन्ता कि कोई बात नहीं थी.. क्यों? क्योकि मेरे दुसरे हाथ में गाजर जो थी.. और फिर गाजर कुतरने लगा..
गाजर और टमाटर का स्वाद लेते बहुत सारी फोटो यहाँ देख सकते है..
कल वेलनटाईन डे था.. थोडा़ बहुत मैने भी मनाया, कहां, कैसे... ये सभी अगली पोस्ट में..
* पैराम्बुलेटर - आप अंदाजा लगा सकते है, ये नाम मेरे प्राम को किसने दिया? अरे ज्ञान अंकल से सिवा और
कौन दे सकता है ऐसा नया नाम!!
update 2PM- ज्ञान अंकल और ताऊ की सलाहनुसार तस्विरें सिधी कर दी है..
February 14, 2009 at 8:24 PM
अरे खट्टा खाते हुए तो तुम मुंह मिचला रहे हो !
February 14, 2009 at 8:30 PM
अरे यार तुम्हारी फोटो देखने को गर्दन टेढ़ी करनी पड़ रही है। तुम क्या जानो कि स्पॉण्डिलाइटिस क्या होता है!
February 14, 2009 at 8:43 PM
यार पल्टू गुरु, तुम तो टमाटर भी कभी मजे से और कभी बडे मजे से खा रहे हो?
हां फ़ोटो आडी की बजाये खडी होती तो ज्यादा आनन्द आता, जरा पापा को समझा देना और ना समझे तो अब कान पर जरा दांत की आजमाईश कर डालना मजाक मजाक मे ही.:)
February 14, 2009 at 10:18 PM
तस्वीर तो शानदार है...खटाई का स्वाद पता चल रहा है...
February 14, 2009 at 10:32 PM
प्रतिमान और छायाकार दोनों बधाई के पात्र हैं।
सुबह से ही तुम्हारे लिए एक गीत लिख रहा था।
पोस्ट करनेवाला ही था कि लाइट काट दी गई।
इस समय फ़ोटो अपलोड हो रहा है।
जल्दी देखने आना।
ऐसे लोगों को भी लेकर आना, जो तुमको यह गीत पढ़कर सुना सकें।
February 15, 2009 at 12:57 AM
अरे बबुआ, लगता है तुम्हे खट्टा तो लगा लेकिन साथ मे मजा भी आ रहा है, लगे रहो.
प्यार प्यार
February 15, 2009 at 1:25 AM
सुबह गर्दन टेढा करके देखे थे और अब सीधा-टमाटर के मजे लूटे जा रहे हैं..साथ में गाजर भी.बिल्कुल करमचंद जासूस लग रहे हो गाजर खाते हुए. :)
February 15, 2009 at 5:38 AM
चलो,
अच्छा किया,
जो तस्वारें सीधी कर दीं!
कम से कम ताऊ और अंकल को
कुछ तो आराम मिला!
मैं तो यह समझा था
कि टमाटर के स्वाद के प्रभाव से
कुछ देर के लिए
तुम टेढ़े हो गए हो!
February 15, 2009 at 8:35 PM
खट्टा खट्टा टमाटर और खट्टे खट्टे हाव भाव हा हा हा हा हा हा हा पता चला कैसा होता है चीजों का स्वाद .....अच्छा होता है न आदि......
LOVE YA
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