जैसे आपका सबका वेलनटाइन डे मना वैसा मेरा भी मना १४ फरवरी को ही... हाँ पर साइज के हिसाब के... छोटा सा.. १४ की शाम मैं मम्मी और पापा से साथ परी दीदी के घर गया गुड़गाँव में... दीदी के लिये एक गुलाब का फूल भी लेकर गया.. लम्बा रास्ता था.. तो मैं तो रास्ते में ही सो गया.. और उठ कर अपने "रंग" में आता इससे पहले ही पापा ने मेरे behalf से दीदी को फूल दे दिया.. धीरे-धीरे मेरी नींद खुल और में अपने रंग में था.. फिर तो डांस भी किया (कैसे? जल्द बताऊगां) और दीदी के पियानो पर भी हाथ मारे.. डिनर के लिये हम "गैलेरिया" गये.. मैं तो अपना खाना साथ ले कर गया था... वो ही खाया पर प्लेट में हाथ मारना मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, वो भी किया..
अब खाने की टेबल पर या तो मैं बैठ सकता हूँ या फिर पापा मम्मी खाना खा सकते है.. तो फिर बारी लगी पहले पापा खाने लगे और मैं? मैं चला मम्मी के साथ बाहर.. झुला झुलने..
ऐसे बीता मेरा पहला वेलनटाइन डे!!

February 15, 2009 at 9:24 PM
aare waah bahut achha raha aapka vday nanhe miyaa:)
February 15, 2009 at 10:57 PM
"अरे वाह आदि हम भी तो "गैलेरिया" ही गये थी पर आपसे मुलाकात नही हुई.....जरा अपना एड्रेस दे दो ताकि कभी आप से मुलाकात हो जाए बेटा.....हम भी तो गुडगाँव मे हैं.....अपना एड्रेस मेल करना seemagupta9@gmail.com pr ok i will wait"
Love ya
February 15, 2009 at 10:59 PM
बहुत बढिया भाई पल्टू जी. अब पांव निकालने लगे हो? यानि होटलींग भी शुरु कर दी? हमे भी ले चलना यार कभी तुम्हारे साथ.:)
रामराम.
February 15, 2009 at 11:04 PM
ऐसे ही हर वेलेन्टाइन आपके लिए ढेर सारी खुशिया लेकर आए।
February 16, 2009 at 1:29 AM
मजा आ गया। बहुत ही प्यारा बच्चा है और ब्लाग भी उतना ही खूबसूरत।
February 16, 2009 at 3:06 AM
शुरुआत तो बड़ी खूबसूरत रही आपके वैलेंटाइन मनाने की. ऐसे और ढेरों खूबसूरत दिन आयें तुम्हारी जिंदगी में, शुभकामनाएं.
February 16, 2009 at 4:11 AM
ऐसे ही खुशी खुशी मनें बच्चु तुम्हारे हर वेलेन्टाइन डॆ...कुछ सालों में तो फूल खुद ही दोगे..पापा तो घर रहेंगे. :)
February 16, 2009 at 4:16 AM
अरे वाह आदि तुमने तो खूब मजे किए वैलेंटाइन डे पर । :)
February 16, 2009 at 5:32 AM
sweet and cute....
February 16, 2009 at 7:41 AM
वेलेण्टाइन मने तो तुम्हारी तरह! सुन्दर।
February 16, 2009 at 9:27 AM
अरे बबुआ हमे भी बच्चे कई बार "गैलेरिया" ले कर आये, लेकिन हमे मजा नही आता, क्योकि तुम्हारी आंटी ने हमारी आदते बिगाड रखी है, इस लिये घर का खाना ज्यादा मजे से खाता हुं, लेकिन जब बच्चे प्यार से लेजाते है तो उन का दिल भी तो नही तोड सकते... इस लिये उन के सामने तारीफ़ करनी पडती है,
तो बेटा पिज्जा सारा खाया या नही जरुर बताना.
प्यार ओर प्यार
February 16, 2009 at 9:50 AM
i'm loving it!pizza ke liye kah raha hun:)
pahle valentine's par khoob maze kiye!vah bhai vah.
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