मम्मी शाम को ऑफिस के आकर चाय के साथ भुजिया खाना पंसद करती है.. मोटी वाली भुजिया.. नमकीन विशेष रुप से जोधपुर से आता है.. बहुत स्वादिष्ट होता है ये.. मुझे कैसे पता.. अरे मैं भी तो खाता हूँ इसे मम्मी के साथ.. ये भुजिया आसानी से पकड़ में आ जाती है और अब मेरे तीन दांत है इसे तोड़ने के लिये.. दाँतो से तोड़्ते हुए "कट" की आवाज सुन खुश होता हूँ और मजे से खाता हूँ..
कैसी लगी ये नमकीन पोस्ट?
February 25, 2009 at 9:47 PM
निश्चित ही तुम्हारी तरह नमकीन है बेटा। जीते रहो।
February 25, 2009 at 10:15 PM
क्या स्वाद है.... ज़िंदगी के....
February 25, 2009 at 10:23 PM
जियो! भुजिया की नमकीन और मम्मी के स्नेह की मधुरता का सेवन करो!
February 25, 2009 at 10:42 PM
ह्म्म्म्म...मुहं में पानी ला दिया आपने छोटे मियां जी...मोटी सेव जिसने खाई है वो इसके स्वाद को कभी नहीं भूल सकता...हमारे जयपुर में भी मिलती है...लेकिन इसमें तो लाल मिर्च होती है...आपने खा कर सी सी नहीं किया...??? कमाल है? आप तो बहुत बड़े हो गए हो लगता है...
नीरज
February 25, 2009 at 10:51 PM
देख बेटा पल्टू, तू सेव खा. पर सिर्फ़ इतना ध्यान रखना कि उन हाथों को फ़िर बिना धोये आंखों पर मत लगा लेना. वर्ना फ़िर ...:)
रामराम.
February 25, 2009 at 11:25 PM
आईला ........कोम्पुटर में नहीं डलती क्या ..
February 25, 2009 at 11:34 PM
हमें भी खिलाते :)
February 26, 2009 at 12:01 AM
मुझे नमकीन पसंद है .. जाहिर है .. यह पोस्ट भी पसंद आएगा ही ।
February 26, 2009 at 12:46 AM
aare waah namkin khana bhi sikh liya,:)thodahame bhi:)
February 26, 2009 at 2:00 AM
थोडा इधर भी बढाना भई, मुंह में पानी आ रहा है।
February 26, 2009 at 3:33 AM
' ha ha ha ha ha ha aaj to namkin reh hi gyi..kya kren subh se computer hi khrab tha.....ab jakr kuch kaam kr rha hai to aadi se milne chle aaye....pr yhan to chidiya pehle hi dana chug ke ja chuki hai......ye dil mange more na...."
Love ya
February 26, 2009 at 3:38 AM
i like bhajiya toooooo
February 26, 2009 at 4:21 AM
to paltu khokhe kha
raha hai, me bhi har bar jodhpur se ye namkin ( khokhe)lekar aata hun.
February 26, 2009 at 5:15 AM
क्या-क्या दे देते हो हीरो, इसका हिसाब लगाना मुश्किल है. भुजिया तो मस्त होगी ही, उससे ज्यादा तुम हो. जीते रहो.
February 26, 2009 at 6:12 AM
झपट-झपटकर, कटर-कटरकर,
खाओ, खाओ, जी-भर भुजिया!
नीचे गिरती है, गिरने दो,
खाएगी, भइ, आकर चुहिया!
February 26, 2009 at 6:16 AM
खाओ ख़ूब मज़े ले-लेकर,
अभी नमक से भीगी भुजिया!
होली में अब मीठी-मीठी,
तुम्हें खिलाएँगे हम गुझिया!
February 26, 2009 at 10:47 AM
अबे पलटू यार हमे पता बत रहा है, ओर खुद मजे से कट कट कर के खा रहा है, अबे हमे भी भेज दे दस बारहा पकेटे...:)
मजे कर बेटा, वेसे हमे पता है अभी तु इस डिब्बे को फ़र्श पर फ़ेला कर फ़िर उसे हाथो से मसल कर, ओर रोकने पर चिल्लयेगा, ओर फ़िर खायेगा...
बेटा बहुत बहुत प्यार
February 26, 2009 at 7:07 PM
These pics are great .
Your kid has really grown up
Rishi is cool . Do come over some time
See You
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