तो मम्मी ने आज मेरे लिये हींग जीरे का तड़का लगा आलु टमाटर की सब्जी बनाई.. और उसे हरे धनिये से सजाया.. और फिर मुझे सब्जी में चूर चूर कर रोटी खिलाई.. और मैंने भी इस नये स्वाद का खुब आंनद लिया..
अरे आदि अकेले अकेले सब खा लिया? किसी को पुछा ही नहीं...
सूचना :- आज पोलीयो रविवार है और मैं हमेशा की ही तरह पोलीयो की दवा पीने जाऊगां.. आप आ रहे है न!
February 28, 2009 at 8:17 PM
नया स्वाद लिया आज आपने ..:)
February 28, 2009 at 8:27 PM
बहुत अच्छा बच्चा हो गया पल्टू तो. बस ऐसे ही रोज खाया करो और पोलियो की दवाई जरुर पीके आना. शुभकामनाएं.
रामराम.
March 1, 2009 at 12:40 AM
पलटू लगता है अब तो बेटा राजा बाते भी करता है, ओर तुम्हारी बाते मां बाप तो जरुर समझते होगे, चल बेटा अब जल्दी जल्दी खाना खाओ फ़िर अपने पेरो पर खडे हो कर पापा का हाथ बटाओ..
प्यार ओर प्यार
March 1, 2009 at 7:16 AM
कढ़ाई में सजी सब्जी देखकर तो
मुँह में पानी आ गया!
मैंने आपकी आंटी को बोल दिया है
कि मेरे लिए भी
ऐसी ही सब्जी बननी चाहिए,
नहीं तो भूख-हड़ताल हो सकती है!
और हाँ, इस बार का अंतिम फ़ोटो
बहुत जानदार है!
March 1, 2009 at 10:54 AM
अरे वाह...आपके तो मज़े हो गए! रोज़ नए नए स्वाद ले रहे हो!
March 1, 2009 at 7:51 PM
"'अरे वाह बेटा जी आज तो दस महीने को गये आप.....और आज आलू की सब्जी भी मिल गयी खाने को......कैसा लगा.....और अपने नन्हे नन्हे हाथो से खाने का मजा तो कुछ और ही है न..."
Love ya
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