छोटी बॉल से तो मैं बहुत खेलता हूँ, और पापा से एक मैच भी गया.. आपने देखा भी तो होगा न.. और उडन तश्तरी अंकल ने तो मुझे मैच के बीच फुटबाल टेस्ट करते हुऐ भी पकडा था.. पता है मेरे पास एक बड़ी बॉल भी है... बहुत बड़ी.. पर उससे तो मुझे बहुत डर लगता था.. अगर उसे कोई मेरे पास भी लाता तो मैं रोने लग जाता था.. पापा ने मेरा डर भगाने की कोशिश भी की पर.. ना बाबा ना..
मैं बडा़ हो गया हूँ . और अब मैं उस बॉल से बिल्कुल नहीं डरता हूँ.. ये तो अच्छी तरह से मेरी पकड़ में आ जाती है और मैं इससे बडे़ मजे से खेल सकता हूँ. अब कोई डर नहीं..
मैं बडा़ हो गया हूँ . और अब मैं उस बॉल से बिल्कुल नहीं डरता हूँ.. ये तो अच्छी तरह से मेरी पकड़ में आ जाती है और मैं इससे बडे़ मजे से खेल सकता हूँ. अब कोई डर नहीं..
टोपी संभालु या बॉल?
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January 7, 2009 at 7:17 PM
शाबाश ! ऐसे ही सभी डर छोडते जाओ !
पर भाई तुम्हारा ब्लॉग खुलने में बहुत समय लेता है . रहम करो गरीबों पर :)
January 7, 2009 at 7:36 PM
धन्यवाद विवेक अंकल,
आपकी सलाह पर तुरंत काम किया है, काफी विजे़ट हटा दिये है.. अब शायद कम समय ले...
यदि अब भी ज्यादा समय ले रहा है तो जरुर बताना.. पापा से और मेहनत करवाऊगां
January 7, 2009 at 7:38 PM
वाह..तुम तो बड़ा मस्त इंसान हो। अब तुम वाकई बड़े हो गए हो, निडर भी। जम के खेलो।
January 7, 2009 at 8:02 PM
बहुत अच्छे..अंकल के रहते किसी से भी क्या डरना. जरा इसे भी टेस्ट करके तो बताना कि कैसी है? हा हा!!
न्यू ईयर के न्यू खिलौना दिलवाकर देने को कहो मम्मी पापा को वरना रो रो कर हालाकान कर देना.
January 7, 2009 at 9:04 PM
यार छोटू इतने दिनों से आ नही पाया तुमसे मिलने.. अब तो तुम काफ़ी बहादुर हो गये हो.. इसी तरह से डर मिटाते रहो.. जब बड़े हो जाओगे और हमारे कमेंट्स देखोगे अपनी ब्लॉग पर.. तब हमे भूलना नही..
तुम्हारे पापा तुमसे बहुत प्यार करते है.. देखो तुम्हारे लिए कितना प्यारा ब्लॉग बनाया है.. याद रखना तुम्हारे पापा 'बेस्ट डैड' है..
हा एक शिकायत मुझे भी है.. ब्लॉग देर से खुलता है.. चिंता मत करो.. तुम्हारे लिए जल्दी से एक अच्छा ले आउट ढूंड के देता हू..
January 8, 2009 at 12:50 AM
आदित्य,
डरो मत, क्योंकि डर के आगे जीत है.
January 8, 2009 at 1:23 AM
भविष्य के फुटबाल स्टार का दर्शन कर धन्य हुआ!
January 8, 2009 at 3:01 AM
वाह!
ऐसे ही 'बाल क्रीड़ा' करते रहो. टोपी संभालना पहले सीखो. टोपी है तो बाल है. टोपी गई नहीं कि बालों में धूल-मेल जम जायेगी.
January 8, 2009 at 8:04 AM
लगता है आजकल बहादुर हो गए हो ! बस ऐसे ही बहादुर और निडर बने रहो !
January 8, 2009 at 11:00 AM
अबे पलटू, अकेले अकेले ही खेल रहे हो भाई, अरे यार सभी बच्चे डर जाते है , गुबारा फ़टने से भी तो डर लगता है ना, लेकिन एक दो बार ही फ़िर नही, चलो अब बाहदुर बन गये तुम तो.
प्यार
अब भी बांलाग खुलने मै बहुत देर लगती है जब की मेरा नेट तो बहुत तेज है,
January 9, 2009 at 2:11 AM
हां तो भाई पल्टू दादा, खेलो मस्ती करो और मम्मी पापा को तंग करो पर तुम सर्दी से बच कर रहो. ठीक है?
और खेलने के लिये ताऊ को भी बुला लिया करो कभी
कभी.
January 9, 2009 at 2:50 AM
bahut badia
January 11, 2009 at 2:06 AM
अरे छोटे हो कहाँ तुम ?
ठीक तो हो !
January 11, 2009 at 5:21 AM
बेहद सुन्दर .
January 11, 2009 at 6:50 AM
विवेक अंकल,
मैं बिल्कुल अच्छा हूँ, चाचा की शादी के लिये जोधपुर गया हूँ.. जल्द ही आपको खबर देता हूँ..
धन्यवाद,
आदि..
January 13, 2009 at 12:29 AM
dear aaditya be bold and never afraid of anything except ur parents, cos they love u very much
January 13, 2009 at 9:03 AM
मस्त रहो पर ठंड से थोड़ा जरूर डरना।
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