लेकिन कभी कभी मैं भी कंफ्युज हो जाता हूँ.. जब एक साथ दो दो चीजें मिले.. समझ नहीं आता किसे लूं और किसे छोड दूं.. ऐसा ही मेरा जैकेट है.. दो-दो लटकने वाली चीजें है.. और दोनों मुझे बराबर आकर्षित करती है..समझ नहीं आता कि ये लूं कि वो लूं.. फिर क्या दोनों पकड़ लेता हूँ.. और उन्हे मुँह में डालना तो मेरा अधिकार है..
कैसी लगी आपको मेरी बातें? जरुर बताऐं..
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January 27, 2009 at 6:46 PM
तुम्हें बार बार बताना पडेगा क्या ? जब दाँत सुरसुराएं तो काट खाने के लिए मम्मी पापा हैं ना ! क्यों आलतू फालतू चीजों को कुतरते हो ?
January 27, 2009 at 7:45 PM
Bahut pyari harkatein karte ho Aadi!
January 27, 2009 at 8:09 PM
पल्टू भाई जरा विवेक जी की बात पर गम्भिरता पुर्वक ध्या दो और उसका रिजल्ट हमें बताना. :)
January 27, 2009 at 8:10 PM
टोपी खा जाओगे तो पहनोगे क्या??
पापा/मम्मी की गोद में तो बैठे हो, धीरे से कान काट लो. फिर हँसना. :)
January 27, 2009 at 9:19 PM
अरे वाह.. हमारा चूहा बिटवा तो अब बिल्ली कि पूछ तक को कुतरने लगा है.. :)
January 27, 2009 at 9:23 PM
अदीईई आज तो ये नीला पिला रंगों वाला टेम्पलेट आँखों को खुब भाया.....और तुम्हारी प्यारी प्यारी बातें दिल को....."
Love ya
January 28, 2009 at 3:43 AM
कमल कर रहे हो तुम. छोटू अगर इसी तरह से दो-दो चीजें सामने रखकर फ़ैसला करोगे तो डिसीजन मेकिंग थ्योरी के मास्टर बन जाओगे....:-)
डिसीजन मेकिंग कैपेसिटी तो बिल्ली की पूँछ क़तर कर साबित भी कर दिया. फालतू में सब कहते हैं कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा? तुमने साबित कर दिया कि गले में घंटी बाँधने की ज़रूरत ही नहीं है. पुँछ क़तर कर बिल्ली को उसकी औकात बताई जा सकती है.....इंटेलिजेंट किड.
फोटो में गजब लग रहे हो. मैं निर्णय नहीं कर पा रहा हूँ कि कौन सी फोटो सबसे बढ़िया है.
January 28, 2009 at 6:20 AM
doobeyji kho gaye adi ki shararton mein
January 28, 2009 at 7:45 AM
ये लूं कि वो लूं...
जो मर्जी ले ले आदि, अभी तुझे कोई कुछ नही कह सकता , जितनी मर्जी तोड़ फोड़ कर | जब बड़ा होकर इस ब्लॉग पर ये फोटो देखेगा तब मजा आएगा |
January 29, 2009 at 10:06 AM
आज मैंने सुंदर-सुंदर फूलों के
सौ से ज़्यादा फ़ोटो लिए,
पर तुमसे ज़्यादा प्यारा
और
ख़ूबसूरत उनमें से एक भी नहीं था।
तुम जब भी "सरस पायस" पर आते हो,
वहाँ की शोभा
कई गुना बढ़ जाती है!
मेरी ओर से
तुम्हारे लिए -
प्यार ही प्यार!
बेशुमार!
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