पापा अपने हाथ मेरे सामने लाते है और कहते है "दे ताली".. फिर देखिये मैं पूरी ताकत से उनके हाथों पर अपने हाथ पटकता हूँ..और पापा खुश हो जाते हैं.. हम दोनों बहुत देर तक ऐसे तालियाँ बजाते है..
अकेले में भी मैं दोनों हाथों से ताली बजाता हूँ.. और तो और कई बार ताली बजा बजा कर रोता हूँ.. है न मजेदार :)
आप सभी तो गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं!!
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(आपकी प्रतिक्रिया मिली थी की मेरा ब्लोग खुलने में काफी समय लेता है, तो आज इसका हुलिया बदल दिया है.. (वैसे तो कुश अंकल भी नया हुलिया भेजने वाले हैं.. पर तब तक ये ही सही).. अगर अब भी ये ज्यादा समय ले तो जरुर बताना..)
January 25, 2009 at 9:36 PM
अरे यार पल्टू वो क्या है ना कि तेरे से मिलने की जल्दी रहती है ना इसलिये लगत है कि देर लग रही है.:)
आज दिन भर तालीयां बजा कर जवानों की होसला अफ़्जाई करते रहना.
गणतंत्र दिवस की बधाई और घणी रामराम जी.
January 25, 2009 at 10:31 PM
अरे वाह खूब ! ताली बजा रहे हो !
पिछले १५ दिनों से तुम्हारे शहर जोधपुर में था आज ही आया हूँ आते ही तुम्हारा ब्लॉग देखा डिजाईन बहुत अच्छा लगा !
January 26, 2009 at 2:18 AM
हमको भी-दे ताली!!
आपको एवं आपके परिवार को गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.
January 26, 2009 at 5:07 AM
तुम्हारी ताली की आवाज सुन कर भागा चला आया। कभी मेरे ब्लाग पर आओ तो तुम्हें शानदार कविताएं सुनाऊंगा http://babloobachpan.blogspot.com
January 26, 2009 at 5:40 AM
बढ़िया पोस्ट। दे ताली!
January 26, 2009 at 10:21 AM
पलटू भाई खुब बजाओ ताली. शाबस
गणतंत्र दिवस पर आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं
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