पहली कविता शिव कुमार मिश्रा की कलम से

अले, मेला हीलो हमांगा भी कलता है!
टोपी पहनकर बाला क्यूट लगता है
दूध और बिस्किट खाता है
स्मार्ट है
इसे तो सूजी की खीर और फल भी भाता है
पापा और मम्मी से मेहनत भी करवाता है
जब भी दीखता है, एक मुस्कान दे जाता है.
दूसरी कविता रावेंद्रकुमार रवि की कलम से मेरे मन को भा गए अब तुम प्रिय आदित्य,
मन करता है - आज से देखूँ तुमको नित्य!
थेंक्यु अंकल..
आज मेरा मंथली बर्थडे है, अब मैं पूरे आठ माह का हो गया.. क्या कहा इस मौके पर आप मुझे गले लगाना चाहते हो? आप दूर हैं कोई बात नहीं e-hug है न? यहां click करें मुझे गले लगाने के लिये. .

January 1, 2009 at 7:42 PM
मासिक जन्मदिन की हार्दिक बधाई बेटा ....
अदि की हर बात है न्यारी,
मुस्कान बिखेरे प्यारी प्यारी,
चंचल चंचल आंखों वाला,
बेपरवाह और मतवाला ,
सबके दिल को बहुत है भाता,
अपनी बाते जब वो सुनाता ..
"love ya'
January 1, 2009 at 7:56 PM
baten to sab good hee hoti hain.
January 1, 2009 at 7:57 PM
मुस्कान ही तो सबसे जरुरी है जिंदगी में. नारायण नारायण
January 1, 2009 at 8:07 PM
दाता तुम पेर है आस्था
मेरी श्रादा का वास्ता
आदी को दिखाना रास्ता
उसका जीवन सफल हो
सिर्फ जन्मदिन ही नहीं
उसका हर पल उज्जवल हो
January 1, 2009 at 8:16 PM
बहुत बढिया पल्टु राम जी। फ़टाफ़ट बडे हो जाओ और ताऊ की स्कूल मे भर्ती हो जाओ। तुम्हारे जैसे जन्मजात होनहार की जरुरत है ताऊ की स्कूळ में।
January 1, 2009 at 8:27 PM
बहुत मुकद्दर वाले हो चिट्ठाजगत के लाडले आदि , अब दो और कविताये भी मिल गई |
January 1, 2009 at 10:28 PM
सही कह रहे है रतन चाचा...
January 2, 2009 at 2:54 AM
अबे पलटू अब तो खुब मस्ती कर रहा है, आज तो बहुत प्यारा लग रहा है बेटा,
प्यार
January 2, 2009 at 3:09 AM
लो और आ गईं दो कविताएं . अब तो खुश ? और चाहिए तो बता देना शरमाने की जरूरत नहीं है . ऑन डिमाण्ड छाप देंगे ! कुछ स्पेशल चॉइस हो तो वह भी बता देना , मतलब रस छन्द अलंकार वगैरह वगैरह . हम से क्या शरमाना ? जहाँ फालतू लिखते रहते हैं वहाँ तुम्हारे लिए भी लिख देंगे . पर खुश रहो ! :)
January 5, 2009 at 11:21 PM
बली प्याली प्याली कविताएं हैं।
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