सुबह समय से ही उठा.. सात बजे.. और हमेशा की ही तरह..नहा के तैयार हो गया.. आज मम्मी ने नये कपडे़ पहनाये कुर्ता-पायजामा.. पापा भी तैयार हो गये.. और हम चले.. पर ये क्या आज पापा आंटी के घर जाने के बजाय मुझे नीचे ग्राउंड पर ले गये.. वंहा पहले से काफी लोग थे.. तब पता चला आज कुछ खास है... थोड़ी देर बाद ही ध्वजारोहण हुआ.. सबने "जन-गण-मन" गाया.. और फिर लड्डू भी मिला.. मैने तो अपना लड्डू वहीं खा लिया..
पापा मम्मी की भी छुट्टी, तो फिर पूरा दिन खूब मस्ती की आप भी देखिये एक झलक..
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(आपकी प्रतिक्रिया मिली थी की मेरा ब्लोग खुलने में काफी समय लेता है, तो आज इसका हुलिया बदल दिया है.. (वैसे तो कुश अंकल भी नया हुलिया भेजने वाले हैं.. पर तब तक ये ही सही).. अगर अब भी ये ज्यादा समय ले तो जरुर बताना..)
January 26, 2009 at 7:31 PM
भई वाह ! ब्लॉग का रंग बदल दिया ! बहुत अच्छा लग रहा है अभी !
January 26, 2009 at 7:48 PM
लड्डू खा चुके..फिर काहे गेंद खा रहे हो जी.
कुर्ता पैजामा तो हम भी पहने थे मगर उतना नया और रंग बिरंगा नहीं, जितना सुन्दर तुम्हारा है. कुछ लड्डू हमारे लिए भी लाये क्या पापा?
बहुत प्यारे लग रहे हो..गणतंत्र दिवस पर खूब प्यार.
January 26, 2009 at 7:50 PM
सर्दी आई सर्दी आई
बबुआ ढ़ूँढ़े गरम रजाई..
नहीं मिली तो रोया जम कर..
मम्मी ने तब दी दूध मलाई.
सर्दी आई सर्दी आई.
January 26, 2009 at 8:26 PM
सर्दी आई सर्दी आई
पीछे से बिल्ली मौसी आयी
बिल्ली मौसी नाची जम कर
मुन्ने कि खूब हुई हंसाई
सर्दी आई सर्दी आई
:)
January 27, 2009 at 12:46 AM
बहुत स्मार्ट लग रहे हो कुर्ते पायजामे मे.
लड्डू थोडे से चुपचाप इधर भी खिसका दो यार पल्टू भाई. :)
रामराम.
January 27, 2009 at 1:53 AM
अरे वाह, आप काफी स्मार्ट होते जा रहे हो।
January 27, 2009 at 4:45 AM
चका चक है ब्लॉग का रंग भी ओर कुरते में तुम भी....
January 27, 2009 at 9:06 AM
अबे पलटू तुम्हारी टोपी तो बहुत प्यारी है,
चलो झंडा फ़हरा लिया, अरे लगता है लड्डू खा रहे हो.
अच्छा बेटा बहुत बहुत प्यार
January 27, 2009 at 9:26 PM
आदि अब ब्लॉग ठीक से खुल रहा है पहली बडी परेशानी होती थी....बहुत प्यारे लग रहे हो...."
Love ya
January 28, 2009 at 7:00 AM
झंडा फहराने की बधाई....
अब हर साल इसी तरह झंडा फहराना...
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