बैठना सीख रहा हूँ.. थोडा सहारा मिल जाये तो कुछ देर बैठ भी सकता हूँ.. सोफा पर बैठता हूँ, पंलग पर बैठता हूँ, आंगन में बैठता हूँ.. और.. और... पापा के कन्धे पर भी.. शान से.
शावास बेटा, अबे हम अपने पापा से डरते थे, ओर हमारा बेटा उन्हे घोडा बना कर सारे घर मे घुमाता था, क्या तुम भी ऎसा करते हो?? चलो अभी तो पापा को ही घोडा बना कर घुमाओ
December 5, 2008 at 7:09 PM
अरे पापा को घोड़ा बनाकर पीठ पर बैठ फ़िर ले सवारी करने का मजा |
December 5, 2008 at 10:57 PM
बहुत अच्छे आदि.. रतन अंकल ने सही कहा.. पापा को घोड़ा बनाओ
December 6, 2008 at 12:15 AM
दुनिया का नारा "जमे रहो "
December 6, 2008 at 2:28 AM
देखो बेटा पापा के कंधे पर बैठे तो हो पर ध्यान रहे शु शु मत कर देना .
December 6, 2008 at 4:04 AM
शावास बेटा, अबे हम अपने पापा से डरते थे, ओर हमारा बेटा उन्हे घोडा बना कर सारे घर मे घुमाता था, क्या तुम भी ऎसा करते हो?? चलो अभी तो पापा को ही घोडा बना कर घुमाओ
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