पहले तो स्टेण्ड से खेला करता था.. उसे उठा भी लेता था.. पर अब तो उसे खोल भी लेता हूँ.. एसे ही खेल में एक छड़ी हाथ में आ गई.. फिर क्या था.. आप ही देखिये..
देखिये आपसे बात करते हुए समय कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला न? ये इस ब्लोग पर १०० वीं पोस्ट है.. है न?
December 22, 2008 at 3:43 AM
स्लो कनेक्शन के कारण तुम्हारी कारस्तानी तो हम देख नहीं सके . पर तुम सौवीं पोस्ट की बधाई तो लो :)
December 22, 2008 at 3:49 AM
बहुत ही बढ़िया
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http://prajapativinay.blogspot.com/
December 22, 2008 at 4:17 AM
सौवी पोस्ट के लिए बधाई !
December 22, 2008 at 9:51 AM
अबे पलटु लगता है अब सब को इस डंडे से सीधा करोगे, जो तुम्हे प्यार नही करेगा ??
ओर सॊवीं पोस्ट की बधाई
December 24, 2008 at 3:14 AM
100 पोस्ट हों गयी खेल खेल में।
December 24, 2008 at 6:18 AM
सौवीं पोस्ट की बधाई और पल्टू को प्यार !
रामराम !
December 31, 2008 at 5:34 AM
वाह!! १०० पोस्ट-शतकवीर को सलाम!!
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