कल बताया था कि मेरे दांत आ रहे है और अब मैं नयी नयी चीजे़ खाना सीख रहा हू! (देखे अपने दायें कालम में, मेरे नये स्वाद). अब खाना सीखा है तो पोटी करना भी तो सीखना पडे़गा न? मुझे तो एक चेयर काफ़ी पहले ही गिफ्ट में मिल गयी थी, जब में अर्पित, क्षितिज चाचा से मिलने चंडीगढ़ गया था तबसे.. खैर इतने दिनों तो ऐसे ही रखी थी पर अब मैने इस कुर्सी का उपयोग भी शुरु कर दिया है.. अभी तो बस सीख रहा हूँ इस पर बैठना, कभी-कभी थोड़ा डर भी जाता हूँ... पर इसके आगे लगे छल्ले है न मन बहलाने के लिये..
अरे बाबा!! क्या-क्या सीखना पड़ता है यहाँ?

December 25, 2008 at 7:38 PM
बस अभी से बोर होने लगे सीखने से अभी तुमने सीखा ही क्या है :)
December 25, 2008 at 7:47 PM
अभी तो बहुत कुछ सीखना पड़ेगा पपलू !
December 25, 2008 at 8:36 PM
हाय पल्टू ! जल्दी बडा होकै ताऊ की सकूल (school) म्ह आज्या ! तन्नै भी ताऊ बणा देगा ! :)
रामराम १
December 25, 2008 at 8:53 PM
daat aaye khana sikha aur chair par baithna bhi:):),chalo mom ka ek kaam kum ho jaega:):)subhah ka.
December 25, 2008 at 9:38 PM
अरे याडी, सीखो सीखो, फेर दोन्नु आवारागर्दी करते फिरेंगे.
December 26, 2008 at 12:30 AM
दांत का भी ध्यान रखना ओर अपनी इस चेयर का भी......ठंडी बहुत है ,मोजे पहनते हो या नही ?
December 26, 2008 at 1:16 AM
अरे बेटा खुद ही सीख लो अच्छा है ... वरना सीखना तो पडेगा ही.
लेकिन तुम्हारे चेहरे की रोनक कहां हे?? हंसते हुये सुंदर लगते हो.
प्यार
December 31, 2008 at 5:29 AM
इतना मूँह क्यूँ बनाया है-दाँत निकलने का दर्द हो रहा है क्या हमारे बबुआ को??
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