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क्या-क्या सीखना पड़ता है!

कल बताया था कि मेरे दांत आ रहे है और अब मैं नयी नयी चीजे़ खाना सीख रहा हू! (देखे अपने दायें कालम में, मेरे नये स्वाद). अब खाना सीखा है तो पोटी करना भी तो सीखना पडे़गा न? मुझे तो एक चेयर काफ़ी पहले ही गिफ्ट में मिल गयी थी, जब में अर्पित, क्षितिज चाचा से मिलने चंडीगढ़ गया था तबसे.. खैर इतने दिनों तो ऐसे ही रखी थी पर अब मैने इस कुर्सी का उपयोग भी शुरु कर दिया है.. अभी तो बस सीख रहा हूँ इस पर बैठना, कभी-कभी थोड़ा डर भी जाता हूँ... पर इसके आगे लगे छल्ले है न मन बहलाने के लिये..


अरे बाबा!! क्या-क्या सीखना पड़ता है यहाँ?
8 comments:

Comments

बस अभी से बोर होने लगे सीखने से अभी तुमने सीखा ही क्या है :)


अभी तो बहुत कुछ सीखना पड़ेगा पपलू !


हाय पल्टू ! जल्दी बडा होकै ताऊ की सकूल (school) म्ह आज्या ! तन्नै भी ताऊ बणा देगा ! :)

रामराम १


daat aaye khana sikha aur chair par baithna bhi:):),chalo mom ka ek kaam kum ho jaega:):)subhah ka.


अरे याडी, सीखो सीखो, फेर दोन्नु आवारागर्दी करते फिरेंगे.


दांत का भी ध्यान रखना ओर अपनी इस चेयर का भी......ठंडी बहुत है ,मोजे पहनते हो या नही ?


अरे बेटा खुद ही सीख लो अच्छा है ... वरना सीखना तो पडेगा ही.
लेकिन तुम्हारे चेहरे की रोनक कहां हे?? हंसते हुये सुंदर लगते हो.
प्यार


इतना मूँह क्यूँ बनाया है-दाँत निकलने का दर्द हो रहा है क्या हमारे बबुआ को??


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