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कहाँ चढ़े हो?

बैठना सीख रहा हूँ.. थोडा सहारा मिल जाये तो कुछ देर बैठ भी सकता हूँ.. सोफा पर बैठता हूँ, पंलग पर बैठता हूँ, आंगन में बैठता हूँ.. और.. और... पापा के कन्धे पर भी.. शान से.

5 comments:

Comments

अरे पापा को घोड़ा बनाकर पीठ पर बैठ फ़िर ले सवारी करने का मजा |


बहुत अच्छे आदि.. रतन अंकल ने सही कहा.. पापा को घोड़ा बनाओ


दुनिया का नारा "जमे रहो "


देखो बेटा पापा के कंधे पर बैठे तो हो पर ध्यान रहे शु शु मत कर देना .


शावास बेटा, अबे हम अपने पापा से डरते थे, ओर हमारा बेटा उन्हे घोडा बना कर सारे घर मे घुमाता था, क्या तुम भी ऎसा करते हो?? चलो अभी तो पापा को ही घोडा बना कर घुमाओ


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