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दुविधा

आदि के जन्म के बाद से ही अंजु (आदि की मम्मी) ने ओफि़स से छुट्टी ले रखी थी... लगभग साढे़ आठ माह से.. अंजु के ओफि़स को लेकर काफी दुविधा बनी हुई थी.... अगर अंजु ओफि़स जाती है तो आदि का ख्याल कौन रखेगा..क्या करे क्या नहीं.. काफी समय से सोच विचार चल रहा था..? और फैसले वक्त पर छोडे़ हुए थे.... अंजु लंबा अवकाश ले या फिर आदि को क्रेच में छोडे़... आदि को क्रेच में छोड़ने का विचार ही उदास करने जैसा है.. प्यारे आदि को कैसे किसी के भी पास छोड़ दे.. और कई लोगों से कई तरह के अनुभव भी सुने.. आखिर तय किया कि पता लगाया जाये क्रेच के नाम पर क्या विकल्प है.. लोगों से बात हुई.. गूगल की मदद ली और फिर कुछ जगह चक्कर लगाये.. कुछ ने कहा कि छोटे बच्चों (डेढ़ साल से कम) को नहीं रखते.. और जो कुछ तैयार हुए, वहां कि सफाई और अन्य चीजें देखकर तौबा कर ली.. अब कोई विकल्प नहीं था.. लगभग तय कर लिया था कि अंजु लम्बा अवकाश लेकर आदि का ख्याल रखेगी.....
इसी बीच एक नया विकल्प सामने आया.. पडौ़स की एक आंटी आदि को अपने पा़स रखने को तैयार हो गई.. सभी कुछ ठीक लग रहा है... घर के एकदम पास (बस एक फ्लोर ऊपर).. और घरेलु माहौल.. व्यवसायिकता से कुछ दूर...
सोचा है ये विकल्प आजमाने का... शुरु में सप्ताह में एक या दो दिन कुछ घण्टों के लिये.. और अगर आदि का मन लगता है और आदि अच्छा रहता है.. तो फिर धीरे धीरे...ज्यादा देर के लिये..
बहुत मुश्किल निर्णय है, पर.. क्या करें एकल परिवार में रहतें है.. तो आज आदि आंटी के पास..


6 comments:

Comments

बहुत ही अच्छा विचार है, वह व्यक्ति (देखभाल करने वाला) सगा और बूढा हो तो वह ज्यादा लाभदायक है क्योंकि उसे हर बात का अनुभव होता है और वह सही से देखभाल कर सकेगा.
आदी ! अब तुम मम्मी को परेशान करना छोड़ो.
आपका क्रेच में नहीं छोड़ने का निर्णय एकदम सही है. आप इसके लिए बधाई की पात्र हैं.
सब कुछ अच्छे से हो, यही दुआ है.


आंटी को ज्यादा परेशान मत करना. कैल्शियम की गोली खाओ. खिलौने उठाकर पटको. उलट-पलट करते रहो. हमेशा खुश रहो.


एकल परिवार में यही परेशानी है बच्चों को बड़े-बूढों का सही मायने में प्यार और उनकी देखभाल नसीब नही होती | कितने खुसनसीब है हम लोग जो संयुक्त परिवार में पले बढे |
खैर निर्णय अच्छा है |


कही भी छोडो, लेकिन अगर दादा दादी ( आप के मां बाप) के पास रहेगा तो आप दोनो बेफ़िक्र भी रहेगी, इस लिये यह उचित है ओर बच्चे मै संस्कर भी दादा दादी ही डाल सकते है,ओर अगर दादा दादी आप के पास नही रह सकते तो पलटु को उन के पास छोड सकते हो, वह तुम से ज्याद इसे प्यार करेगे, पराया किताना भी अपना पन दिखाये... लेकिन विश्वास.... बाकी यह आप की अपनी घरेलू बात है....
धन्यवाद


वैसे राज भाटिया जी की सलाह भी बहुत अच्छी है दादा दादी की तरह तो बच्चे का पालन पोषण माँ-बाप भी नही कर सकते |


खैर, एकल परिवार की यह समस्यायें तो हैं ही. इन से मूँह नहीं मोड़ा जा सकता. आँटी जी, जहाँ इसे घरेलु वातावरण मिलेगा वह निश्चित ही क्रेच से बेहतर विकल्प है.


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