पापा फिर मुझे घुमाने भी ले गये.. घर से बाहर आकर "पलटुराम" कुछ ठीक हुआ.. बाहर चहल पहल देख थोडा़ मन लगा रहा.. पर वो बात नहीं आई..
घूमकर जब घर पहुंचे तो फिर दादी से बात की.. पता नहीं मम्मी और दादी कि क्या बात हुई पर मम्मी उसके बाद रुई तेल में भीगा कर लाई, उसे मेरे चारों और घुमाया.. फिर उसे जलाया.. और कुछ देर बाद बोली "आदि की बहुत नज़र उतरी है"... अब पता नहीं ’नजर’ थी या कुछ और.. इतने दिनों बाद दिल्ली आया हूँ.. जोधपुर में कितने लोग थे.. जोधपुर की याद भी तो आ सकती है न?
पता है दादी मुझे और "राजस्थानी गीत" सुनाती थी.. इतने दिनों में मैने घुमर, बन्ना और न जाने कितने गीत दादी की गोद में दुबक कर सुने ... और बहुत खुश हुआ..
याद तो आती है. पर अब तो फोन पर ही बात कर लेता हूँ....
दो-तीन दिनों की इस उदासी के बाद आज मन कुछ ठीक हुआ है, और मेरी मस्ती अब धीरे धीरे फिर से परवान चढ़ रही है...

November 5, 2008 at 8:36 AM
तो जनाब दादी के गीत और लोरिया सुन कर आए है अब दिल्ली में याद तो आएगी ही |
November 5, 2008 at 10:41 AM
बढ़िया है, लगे रहिए मस्ती में । परन्तु हमें भी तो दादी के कुछ गीत सुनवा दीजिए ।
घुघूती बासूती
November 5, 2008 at 12:50 PM
अबे पलटू दादी को फ़ोन किया ,दादी भी तो उदास होगी तेरे बिना, चल एक आद लोरी हमे भी सुना...
November 5, 2008 at 8:17 PM
" oh Adee beta ye kya hua, nazar lg gyee kya????????? yaar ab tum itne hrkteyn krty ho pyaree pyaree nazar to lgnee hee the na.... pr bhagwan hr buree nazar se bchaye thumeh....ab to theek ho naa, sach hai yarr dadee ke loree se madhur kuch nahee hotta bachpan mey han... hmesha khush rho.."
love ya
November 5, 2008 at 10:35 PM
hi aadi
arrrrrrrr aise kaise tabiyat kharab ho gayi, itne masti karte ho na isilye. sunkar accha laga ki ab tum thik ho gaye vaise to meri beti shiva bhi bilkul tumhat jaisi hi hein. haa vaise umar bhi yahi to hoti hai masti karne ki.
Lage raho masti mein lekin tabiyat sambhal ke.
November 5, 2008 at 11:26 PM
क्या यार आदि नज़र लगवा दी.. मम्मी को बोलो एक काला टिका लगा कर रखे हमेशा..
November 6, 2008 at 12:09 AM
Ranjan it's amazing to see Adi's blog...chotein mia bade ho rahein hain. Maza aagaya.
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