ट्रेन (२४६१ दिल्ली - जोधपुर - मण्डोर एक्सप्रेस) आई पुरी ३० मिनट लेट..हम सही जगह पर ही खड़े थे.. और जल्दी से ट्रेन में चढ़ गये.. अरे! इसमें तो डिब्बे नई डिज़ाइन वाले थे बिल्कुल नये... लेकिन ट्रेन खचाखच भरी हुई थी.... और मेरे लिये कोई सीट भी नहीं थी..भूख भी लग रही थी.. थो़डी़ देर तो देखा फिर तो मैं दूध मांगने लग गया.. दूध पीते पीते ही मैं मम्मी की गोदी में सो गया...
आस पास में बैठे सभी को लग रहा था कि बच्चा है.. रात में सोने नहीं देगा.. disturb करेगा.. पर वो मुझे नहीं जानते थे...मैं तो disturb करता ही नहीं हूँ.. मैं तो ट्रेन के झूले खा के सो रहा था.. एक बार सोया तो फिर सुबह सात बजे ही उठा..
फिर तो मैं पूरे रंग में था.. सभी के साथ खूब खेला.. हँसा और चिल्लाया भी..
ट्रेन जोधपुर पहुँची 1 घंटा लेट.. दादा स्टेशन पर मेरा इन्तजार ही कर रहे थे.... दादा मुझे लेकर घर आ गये.. और मुझे पूरा घर दिखाया... और biscuit का breakfast भी किया..
अब तो आप जान ही चुकें है की मैं जोधपुर आ गया हूँ.. और आपको यहीं से जोधपुर के बारे बताऊंगा..
"आप सभी को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं"
October 25, 2008 at 12:46 AM
छुक छुक गाड़ी की पहली यात्रा की बधाई!!!!!!!!!!!!!
October 25, 2008 at 2:52 AM
छुक छुक मंडोर एक्सप्रेस में तो बड़ा मजा आता है आदि,में भी इसमे जोधपुर जाता रहता हूँ | पहली बार छुक छुक में बेठने पर बधाई |
October 25, 2008 at 3:46 AM
बहुत बधाई आदि.. मैं भी आ रहा हु जोधपुर..
October 25, 2008 at 7:31 AM
वाह वाह!! अब तो दादा दादी के पास पहुँच गये. खूब शैतानी चलेगी. कोई कुछ बोल भी नहीं पायेगा दादा दादी के सामने. है न!!
खूब पटाखे की आवाज आयेगी. डरना मत. यह बस खेल है खु्शी मनाने के लिए.
पापा मम्मी दादा दादी सबको हमारी दीपावली की बधाई और शुभकामना कह देना और तुमको ढेर सारा प्यार.
October 25, 2008 at 8:57 AM
बहुत ही खूबसूरत आलेख बिल्कुल ही एक नये अंदाज़ में. बड़ी खुशी हुई.
दीपावली की शुभकामनाएँ.
October 25, 2008 at 9:23 AM
अरेम आदि बेटा पहली दिपावली तुम्हे बहुत बहुत खुशीयां ले कर आये. ओर सारी उमर तुम युही खुश रहो...
आपको दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाये !
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