मम्मी पापा सुबह की चाय पी रहे थे, मुझे गोद में लेकर... तो गली में देखने का काम तो मुझे ही करना था न.. एक क्षण के लिये उनका ध्यान हटा और मैं.. अरे अब मैं खुद क्या बतांऊ आप ही देख लो..
बहुत मज़ा आ रहा था पर पापा भी न.. तुरन्त हटा दिया.. चोट लगने का ख़तरा था भाई
(15 Oct 08)
October 15, 2008 at 10:32 PM
हा-हा-हा-हा, आदि के पापा भी तो ग्रील से लटक कर फोटो खींच रहे थे।
October 15, 2008 at 10:32 PM
देखना सभाल के नहीं खुद भी नीचे पहुँच जाओगे।
October 15, 2008 at 11:10 PM
सम्भल कर जनाब.
October 15, 2008 at 11:31 PM
अरे, अभी से ताक-झाँक!...
मैं मजाक कर रहा था. दुनियाँ की पहचान करने की कोई उमर थोड़े न होती है.
October 16, 2008 at 1:08 AM
दुनिया की पहचान ऐसे ही ताक झांक से शुरू होती आदि लगे रहो
October 16, 2008 at 2:54 AM
ये आदि के पापा भी न!! कहाँ जाकर फोटो खींचे हैं??
चाय पीने में मन नहीं लगता क्या कि हमारे आदि को ठीक से ताक झांक भी नहीं करने देते. :)
October 16, 2008 at 4:27 AM
'are yaar tum dekhtey rhe kee kaun aaya or hume aane mey aaj dair ho gyee, dair he shee lakin dekho hum aa gye, chlo ab jhankna band kro ok.....so cute"
love ya
October 16, 2008 at 12:01 PM
आदि बेटा सम्भल के अभी तांक झाक नही ? बुरी बात... वेसे कहते है पुत के पाव पालने मे ही दिख जाते है, लेकिन मामी ओर पापा को बोलो तुम्हारा पुरा ख्याल रखे, चाय के समय भी
प्यार
October 19, 2008 at 3:18 AM
आदित्य बेटा,ऐसे ही ताक-झाँक जारी रखोगे तो लगता है मम्मी-पापा को ग्राउंड floor में घर लेना पड़ेगा
October 19, 2008 at 5:29 AM
अब कब तक तांक झांक चलती रहेगी आगे भी तो कुछ और बताओ नई पोस्ट का इंतजार कर रहे है
October 19, 2008 at 12:36 PM
jayda tak-jak abhi se thik nahi hai janab!
October 20, 2008 at 1:12 AM
कहाँ हो आदि?? लगता है नए घर मैं सेट हो रहे हो. ठीक है जल्दी काम ख़तम करो और नए घर के तुम्हारे अनुभव बताओ.
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