नई जगह आकर मैं खुश था. कुछ समय तक तो मैं ठीक रहा पर रात मैं मुझे तेज़ बुखार आ गया. मम्मी रात भर मेरे माथे पर गिली पट्टी रख बुखार कम करने की कोशिश करती रही पर बुखार तो कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था और मैं घिरे- घिरे सुस्त होता जा रहा था. पता है मेरी आंखे भी नहीं खुल पा रही थी.
जैसे तैसे सुबह हुई पर मेरी हालत में कोई परिवर्तन नहीं हुआ.. पापा सुबह ही नानी के घर आ गये और मुझे डॉ राज धारिवाल के पास ले गये.. डॉ अंकल मे मेरी अच्छी तरह से जाँच की और कहा की मुझे septicemia है. उन्होने मेरे खून कि जाँच की और मुझे इंजेक्शन लगा कर घर भेज दिया..
septicemia का नाम सुन कर पापा चौकन्ने हो गये, उन्होने प्रकाश अंकल से बात की और तय किया कि मुझे एक और डॉक्टर के पास ले जायेंगे. पता है मेरा वजन भी कम हो गया था..
शाम को पापा मुझे और नानी लेकर डॉ अनुराग सिंह के पास गये.. डॉ अंकल का अस्पताल (सरोज अस्पताल) नानी के घर से बहुत दूर था. फिर भी जाना तो था ही ना.
डॉ अंकल ने भी septicemia का ही संदेह जताया और मुझे admit करने की सलाह दी. पापा को भी ये ही ठीक लग रहा था.. और मैं एक अस्पताल से निकल कर दूसरे में भर्ती हो गया :( . मुझे पहली मंज़िल पर एक कमरा दे दिया गया. थोड़ी देर बाद पापा मम्मी को भी अस्पताल ले आयें, पर मम्मी सीढ़ी नहीं चढ़ पा रही थी और अस्पताल में लिफ़्ट तो थी नहीं! तो समस्या हुई कि मम्मी को मेरे पास कैसे ले जाएं? . फिर मम्मी को स्ट्रेचर पर उठा कर मेरे पास लाये.
मुझे drip लगा कर मम्मी के पास लिटा दिया.. हाँ एक बात और यहाँ रोज़-रोज़ सुई नहीं लगती थी.. पता है क्यों? क्योंकि उन्होने मेरे हाथ में स्थाई रुप से एक स्टेण्ड लगा दिया.. अब हर इन्जेक्शन इससे ही लगता था..
मैं अस्पताल में 4 दिनों तक रहा.. दिन मैं मेरे पास दादी रहती थी तो रात मैं नानी.. मम्मी - पापा तो पूरे समय अस्पताल में ही रहे. गुड़िया बुआ भी मुझे देखने आती थी...
मुझे सुबह शाम इंजेक्शन लग रहे थे और मैं धीरे धीरे ठीक हो रहा था.. पहले दो दिन तक तो डॉ कह रहे थे कि मेरी condition stable है.. तीसरे दिन शाम को उन्होने कहा कि "he is out of danger..." यह ही सुनने को मम्मी - पापा तीन दिनों से इन्तजार कर रहे थे..
अगले दिन अस्पताल से मेरी छुट्टी हो गई.. डॉ अंकल ने कहा कि कुछ इंजेक्शन घर पर ही लगवा देना..
मेरे चेहरे कि मुस्कान फिर से लौट आई... thank you डॉ अंकल, thank you प्रकाश अंकल..
September 7, 2008 at 8:58 PM
so cute picture. experience of childhood shared by u is also good.
September 7, 2008 at 9:05 PM
" oh yaar ye tum beemar mt hua kro, tum sirf hansty , kheltey or muskuraty hee acchey lgtey ho ok" so pls take care of yourself. God bless you with good health always.
love ya
September 8, 2008 at 2:10 AM
dil ko chho jaatee hai ye chhoti chhoti baate....
phir bahut yaad aati hai ye chhoti chhoti baate........
September 8, 2008 at 4:16 AM
बहोत खूब! आपको भगवान जल्दी-जल्दी बडा करदे ताक़ि आप भी हमारे ब्लोग पर कमेन्ट दे सको.हमारी शुभकामनाऎ तुम्हारे साथ है।
September 8, 2008 at 10:06 AM
आप सभी का आभार... और रजिया अंकल.. मैं जल्द ही आ रहा हुँ..आपका ब्लोग पढ़ने..
September 8, 2008 at 12:38 PM
बहुत अच्छा लगा, अब तो ठीक हो गये, देखो कुछ गलत मलत मत खाना, ओर जल्दी से बडे हो जाओ.
धन्यवाद
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