लिकमाराम जी है कई सा ?
आज आपको एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूँ.. ये बात तब कि है जब मैं तीन दिन का था. उन दिनों मैं मम्मी के साथ जोधपुर के कमला नगर अस्पताल में था.. शाम के करीब 4-5 बज रहे थे.. तभी हमारे कमरे का दरवाज़ा खुला और एक प्रौढ़ (जो गल्ती से हमारे कमरे मै आ गये थे) से दिखने वाले सज्जन ने पु्छा "लिकमाराम जी है कई सा ?" सब आशचर्यचकित हो उन्हे ताकने लगे.. तभी पापा मेरी तरफ देख कर बोले "लिकमाराम जी सो रहे है सा..." उन्हे अपनी गल्ती पता चली और सभी लोग ठहाके लगा कर हँसने लगे.. मम्मी तो आज भी ये बात याद कर हसँती है.
September 5, 2008 at 6:53 AM
जब स्कूल जाने लगना, तब आपका नाम लिकमाराम ही लिखवा देंगे-घर में बबुआ और स्कूल में लिकमाराम जी!! कैसा रहेगा :)
Post a Comment