लिकमाराम जी है कई सा ?
आज आपको एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूँ.. ये बात तब कि है जब मैं तीन दिन का था. उन दिनों मैं मम्मी के साथ जोधपुर के कमला नगर अस्पताल में था.. शाम के करीब 4-5 बज रहे थे.. तभी हमारे कमरे का दरवाज़ा खुला और एक प्रौढ़ (जो गल्ती से हमारे कमरे मै आ गये थे) से दिखने वाले सज्जन ने पु्छा "लिकमाराम जी है कई सा ?" सब आशचर्यचकित हो उन्हे ताकने लगे.. तभी पापा मेरी तरफ देख कर बोले "लिकमाराम जी सो रहे है सा..." उन्हे अपनी गल्ती पता चली और सभी लोग ठहाके लगा कर हँसने लगे.. मम्मी तो आज भी ये बात याद कर हसँती है.
September 5, 2008 at 3:33 AM
arey waah title padh kar khud ko yaha aane se rok nahi paya.. darasal main bhi jodhpur se hi belong karta hu.. achho blog hai sa!
September 5, 2008 at 9:31 AM
क्या प्यारी-सी यादें हैं। पढ़कर अच्छा लगा।
September 5, 2008 at 9:32 AM
क्या ये आपकी तस्वीर है। सुंदर है।
September 6, 2008 at 11:43 AM
लिकमाराम जी बहुत अच्छा लगा, धन्यवाद
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