शनिवार (१३ सितम्बर) को मैं दिन में सो नहीं पा रहा था.. मम्मी समझ नहीं रही थी कि मुझे क्या हो गया है, मुझे हर समय मम्मी के पास ही रहना पसंद लग रहा था. जुकाम भी ठीक हो गया, बुखार भी नहीं था, पेट दर्द जैसी भी कोई बात नहीं लग रही थी.. तो आखिर क्या था.. मैं क्यों इतना बैचेन हो रहा था.. मम्मी को लगा कि शायद मेरा पेट नहीं भर रहा और मैं भूख से परेशान हूँ. काफी सोच विचार के बाद देर शाम यह तय हुआ कि आदि को ऊपर का दूध देना चाहिये.. तो फिर मेरे लिये बर्तन साफ किये गये.. दूध गर्म हुआ और फिर दूध पीने की तैयारी.. नई चीज़ थी तो मैं भी काफी excited था. थोड़ा तो दूध पिया पर शायद ये वो चिज़ नहीं थी जो मुझे चाहिये थी.. जैसे तैसे मैं खेलते खेलते सो गया.. एक बार सोने के बाद तो मस्त नींद आई..
रविवार को एक और प्रयोग हुआ.. सुबह पापा को लगा कि शायद मेरी समस्या भुख नहीं प्यास है... उन्हे मेरे होठ सुखे सुखे से लग रहे थे.. फिर क्या था.. पानी पिलाने की तैयारी हुई.. और मैने पानी भी पी कर देख लिया.. ये ठीक था..उन्हे लगा की मेरी प्यास कम हुई है..
अब मम्मी कभी कभी दूध और पानी पिलाती है क्या करु? जब तक मैं अपनी बात खुद नहीं बताऊंगा ये सब प्रयोग तो चलते रहेंगें...
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September 17, 2008 at 9:10 PM
हां मेरा मन (बेटा) भी ऐसे ही करता था. तब हमने उसे पानी देना शुरू किया. अब तुम कैसा फील कर रहे हो बेटा. बहुत प्यारे हो ...जीते रहो...एक पुच्ची
September 17, 2008 at 9:24 PM
Hi Adee,
very loving and attractive picture of your han, so eye catching, it is always very pleasurable to see ur new moods and pics always. hmm rhee baat experiment kee to abhe dad or mom ko kerne do, jub apka time aayega na tub gin gin ke ....... ha ha ha smej rhe ho na. just kidding han dad or mom jo aapke liye shee hai na vhee kr rhe hain ok, so enjoy it"
Love ya
September 18, 2008 at 5:45 PM
बहुत खूब!! अब बड़े हो रहे हो...उपर का दूध..पानी!! शाबास, बबुआ. ड्रेसेस बहुत प्यारी प्यारी हैं आपके पास. खूब मस्ती करो. :)
September 19, 2008 at 4:47 AM
जल्दी से बोलना सिख जाओ।
ढेर सारा प्यार
September 19, 2008 at 4:47 AM
जल्दी से बोलना सिख जाओ।
ढेर सारा प्यार
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