
मुझे सुबह जल्दी उठना पसन्द है.. पर पापा मम्मी सोते रहते है. मैं अक्सर सुबह ५-६ बजे उठ जाता हूँ.. उठ के खुद ही खेलने लगता हूँ.. ओर खेलते खेलते जोर जोर से आवाज भी करता हूँ.

.और दीवार ताकता रहता हूँ या फिर बल्ब देखता रहता हूँ..मेरी आवाज सुन पापा-मम्मी भी जाग जाते है.... मैं एक बार तो बिस्तर गिला कर ही चुका होता हूँ..

मम्मी मेरी नेपी बदल कर दुध पिला कर पंलग पर लेटा देती है..
अब मेरे पास मस्ती करने के लिये पुरी ताकत आ चुकी होती है। मै पापा के साथ खेलता हूँ, बाते करता हूँ.. पर अखबार आते ही पापा गायब हो जाते है.. और मम्मी दुध पिला कर फिर से सुला देती है.... जब मैं फिर से उठता हूँ तब तक पापा ओफ़िस जा चुके होते है। और घर में मम्मी और दीदी होते है। उनके साथ खेलता हूँ.


फिर मेरी मलिश होती है। जैतुन, बादाम और नारियल के मिले जुले तेल से. मम्मी अच्छे से कसरत करवाती है, फिर कुछ समय बाद गुनगुने पानी से नहलाती है फिर अच्छे से तैयार करती है. अब तक मैं काफी थक चुका होता हूँ.. और लचं कर के सो जाता हूँ. हां आजकल मम्मी ने मुझे कपडे मे

लपेटना बन्द कर दिया और मैं आराम से फैल कर सो सकता हूँ. शाम को पापा के ओफ़िस से आते आते मै अपनी पुरी उर्जा के साथ तैयार

हो जाता हूँ। पापा के साथ खूब मस्ती
चलती है। कभी झुले में, कभी गोदी में.. आजकल मेरा ध्यान आवाज की तरफ़ जाता है। इसलिये

मेरे सामने बहुत तरह के झुनझुने

बजाये जाते है और मैं बहुत खुश होता हूँ। लुकाछीपी का खेल खेलते, झूला झूलते, और लोरी सुनते सुनते रात ११ बजे तक सो जाता हूँ.
छोटा कर के बोले तो... सोना - जागना, हँसना - रोना, खाना - खेलना, झूला झूलना, सुसु - पोटी करना और हाँ फोटो खिचवाना
यही
जिन्दगी है, और मजे से गुजर रही है, मेरी तो....... पापा-मम्मी का
पता नहीं आप ही पुछ लो ना!
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