कल पापा वापस आए. पापा बाहर गये हुए थे बहुत दूर.. पापा आये तो उनका इतंजार ही कर रहा था. पापा जैसे ही आये मेरे साथ खेलने लगे, बाते करने लगे. मैं भी पापा को देख कर बहुत खुश था.
पापा ने मुझे गोद मे उठा लिया और मेरी मस्ती का कोई ठिकाना ना रहा.. पापा कुछ ज्यादा ही excited थे.. खुद लेट गये और मुझे अपने सीने पर लिटा दिया.. पर अचानक पता नहीं उन्हे क्या हुआ वो मुझे नीचे लिटा कर बाथरुम में नहाने चले गये. मम्मी ने मुझे भी नलहाकर सुला दिया..
पता है.. मुझे एक कछुआ gift मिला है.. मै कछुएं के साथ भी खेल सकता हुँ.. अगर कोई उसे मेरे सीने पर रख दे तो मैं उसकी गर्दन और पाँव पकड कर मुँह मे डालने की कोशिश करता हुँ।
दिन में प्यार करने और ध्यान रखने वालों को रात मे पता नहीं क्या हो जाता है ? मैं खेलने के लिये पुरा active होता हुँ और ये lights off कर मुझे सुलाने की पुरी कोशिश करते है. मैं भी इनसे लुका छीपी का खेल खेलता हुँ। ये मेरी आखें बन्द समझ के सोचते है मै सो रहा हुँ.. और जैसे ही झुला बंद करते है। मैं फिर आखें खोल कर खेलने लग जाता हुँ.. खैर आखिर में मुझे ही सोना पडता है..
July 28, 2008 at 2:58 AM
A sweet kiss to Aadi...
Bura uncle
Sanjib
July 28, 2008 at 2:58 AM
hi aditya
i am very happy and a good news to u that i am deputed at jodhpur as a jr program officer and hope u will meet me
baki bate appen beth kar karenge ch......ch.......ch.........gulu....gulu.....by
by your uncle
rajesh
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