नहीं पता चला, मै बताता हुँ.. मैने मुह मे अंगुली डालना सिख लिया है.. मै खाली समय मे दायें हाथ कि एक अंगुली मुँह मे रख लेता हुँ.. मम्मी सोचती है की भूख लगी है पर उन्हे क्या पता ये मेरा नया शगल है..
जैसी उम्मीद थी मेरे नाखुन नहीं रहे। पापा ने काट दिये जब मे दुध पी रहा था।
पापा की ट्रेनिंग पुरी हो गई है। अब पापा मुझे आराम से उठा लेते है।
(सोमवार, १४ जुलाई)
July 15, 2008 at 8:53 PM
बहुत छोटे बच्चों की देखने, सुनने व स्पर्श करने की शक्ति बहुत कमज़ोर होती है। लेकिन उनके मुख में तंत्रिकायें बहुत विकसित होती हैं। इसीलिये वो सभी चीज़ों को मुंह में डालकर उसे जांचते-परखते हैं। आदित्य आप भी ऐसा ही कर रहे हैं। आपके पापा ने आपके नाखून काटकर एक अच्छा काम किया है। इससे आप कई सारे छुआछूत के रोगों से बचे रहेंगे। नहाते समय मम्मी को आपके हाथ दो बार धुलवाना न भूलें!
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