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मै इनको बहुत पसंद करता हुं.. अलग-अलग समय में अलग खिलौने से खेलता हुँ..
वो देखिये, जो yello- oranage कलर का है, वो मेरे झूले मै लगता है. चाबी लगाने पर ये बहुत तेज घूमता है और आवाज भी करता है..इसके रंग बिरंगे सितारे मुझे बहुत आकर्षित करते है..
दो झुन झुने और एक डफली है.. इनकी आवाज बहुत अच्छी है.. मेरा ध्यान बटाने के लिये इन्हें बजाते है और पापा तो अक्सर मुझे सुलाने के लिये भी इन्हें बजाते है.
green कलर का मंकी देख रहे हो? ये मुझे सबसे ज्यादा पसन्द है.. ये तो आवाज के साथ हाथ हिलाता है, मुँह खोलता है और आखें भी टमकाता है.. जब मैं रोता हुँ तो इसे मुझे चुप कराने के लिये काम लेते है.. और मैं मान भी जाता हुँ.. क्या करु है ही इतना प्यारा, नज़र ही नही हटती.

जो बड़ा सा कछुआ देख रहे है.. ये नया नया आया है.. इसे मेरे सीने पर रख देते है फिर मे प्यार से इसे निहारता हुँ, इसे पकडने पर भी ये चोट नहीं पहुचाता, और अन्दर की बात ये है कि इसकी आड मे मुह में अगुंली भी आराम से रख लेता हुँ.
और भी बहुत सारे खिलोने है.. दादा के पास जोधपुर में रखे है... चाचा उनको जल्दी से भेज दो please..
July 28, 2008 at 2:01 AM
बढ़िया और आदित्य रंजन जी से तो मिलकर बउत-बउत अछा लगा।
July 28, 2008 at 2:59 AM
itne games to humare pass bhi nahi the .
Saloni
July 28, 2008 at 7:19 AM
beta bhut pyara hai. bhut badhiya likha hai aapne. jari rhe.
July 28, 2008 at 10:42 AM
अरे वाह!! आदित्य के पास तो ढ़ेरों खिलोने हैं-हमको भी खिलाओगे?
चाचा जल्दी भेजो बाकी खिलोने नहीँ तो आदित्य नाराज हो जायेंगे. बड़ा प्यारा लग रहा है. :)
August 2, 2008 at 3:49 AM
are ye jo mounkey wala khilona hai ye aadi ka sabse pyara khilona hona hi tha kyoki ye mousi jo layi thi or isame aadi ko apane papa jo dikhte hai
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